छात्रों का राष्ट्रव्यापी काला दिवस 12 Feb. को

साथियों,
12 फरवरी को हीं वर्त्तमान केंद्र सरकार ने बढे षडयंत्र के तहत JNU एवं JNU छात्र संघ के तत्कालीन अध्यक्ष साथी कन्हैया को टारगेट किया। सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से JNU को आरोपित कर साथी कन्हैया सहित अन्य विद्यार्थियों को देशद्रोही बता गिरफ्तारी की घोषणा बडे ताव से की। देश के गृहमंत्री की घोषणा का असर दो घंटे में हीं हुआ और सरकार की पुलिस ने JNU पर धावा बोल बडे साधारण, सामान्य और स्वतंत्र दिनचर्या में लगे साथी कन्हैया को गिरफ्तार किया। उसके बाद पुलिस, सरकार, संघ गिरोह और मीडिया ने खासकर Zee TV, India News, Times Now आदि ने इस गिरफ्तारी को देशहित में सरकार का बडा कदम बताया और प्रदर्शित किया कि देश का बडा आतंकी – देशद्रोही को सरकार ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके बाद तो लगातार देश में अंध राष्ट्रवाद, विद्वेश, उन्माद और नफरत का माहौल बनाया गया। JNU, कन्हैया, वांमपंथ और AISF को देशद्रोही बता नफरत फैला, JNU को बंद करने व कन्हैया को फांसी देने की मांग करवाई गई। पुरा का पुरा माहौल JNU , कन्हैया और वांमपंथ के खिलाफ बनाया गया था। ऐसा असर बना न्यायालय पर हमला करवाया गया, तो कोई कन्हैया का जीभ काटने, गला काटने और हत्या करने वालों को लाखों – करोड़ इनाम देने की घोषणा होने लगी।
बडा अद्भुत नफरत का माहौल बनाया गया था जिसमें मुझे भी बढी हुई ढाढी और झोला के कारण JNU विद्यार्थी समझ हमला का शिकार होना पडा और जो भी पत्रकार केवल रिपोर्टिंग के लिए हीं क्यों न न्यायालय परिसर आए उनका भी संघी गिरोह ने लात- घुसों से जबरदस्त स्वागत किया और कई दिनों तक कन्हैया केस की सुनवाई के दौरान संघी गिरोह ने देश की न्याय प्रणाली पर हमला किया और जो भी कन्हैया और JNU के पक्ष में न्यायालय पहुंचे, उन्हें संघियों के हमले का शिकार होना पडा।
साथियों सवाल उठता है कि इस केंद्र सरकार और इसके गुर्गों ने ऐसा षडयंत्र क्यों रचा ? इतने नफरत और हमलों का माहौल क्यों बनवाया? जबकि आज साल बीतने तक पर भी कन्हैया पर आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाया।
जाहिर है यह कितनी साजिशपूर्ण, षडयंत्रकारी और फासीवादी सरकार है। चूंकि यह सरकार आज भी कायम है और इसका षडयंत्र और हमला आज भी देश के विद्यार्थियों, शिक्षा, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, लोकतंत्र और संविधान पर जारी है इसलिए 12 फरवरी के उक्त हमले का व्यापक प्रतिकार हमसभी विद्यार्थियों और आम जनों द्वारा किया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से AISF ने 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी काला दिवस आयोजित करने की घोषणा की है।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *